Vinayak Chaturthi Katha: गणेश पूजा के समय जरूर पढ़ें विनायक चतुर्थी की यह व्रत कथा, बनी रहेगी – ABP न्यूज़

By: एबीपी न्यूज़ | Updated at : 16 Apr 2021 01:20 PM (IST)

Vinayak Chaturthi Katha
Vinayak Chaturthi Katha 2021: हिंदू पंचांग के मुताबिक, हर महीने में दो चतुर्थी तिथि होती है. एक चतुर्थी कृष्ण पक्ष की और दूसरी शुक्ल पक्ष की. शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. इस दिन गणेश भगवान की पूजा बड़े विधि-विधान से की जाती है. गणेश की पूजा करते समय यह पौराणिक कथा जरूर पढ़ना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार की बात है है कि भगवान शिव तथा माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे बैठे हुए थे. माता पार्वती , भगवान शिवजी के साथ अपना  समय बीताना चाह रहीं थी. इसलिए उन्होंने शिवजी भगवान से चौपड़ खेलने का आग्रह किया. शिवजी भी ऐसा करने कस लिए तैयार हो गए. परन्तु वहां पर दोनों के खेलों के हार जीत का फैसला करने वाला नहीं था.
ऐसे में शिवजी ने कुछ तिनके लिए और उसका एक पुतला बनाया. फिर उसमें उन्होंनें प्राण प्रतिष्ठा कर दी और कहा कि बेटा, मैं यहां चौपड़ खेल रहा हूँ. लेकिन यहां पर कोई भी ऐसा नहीं है था जो हम दोनों के बीच हार जीत का फैसला करता. इस लिए आपको यह देखना होगा कि इस चौपड़ के खेल में कौन हारा और कौन जीता?

googletag.cmd.push(function() { googletag.display(“div-gpt-ad-6601185-5”); });

News Reels
यह कहकर भगवान शिवजी और पार्वती जी ने चौपड़ खेलना शुरू कर दिया. 3 बार खेल खेलने के बाद संयोग से तीनों बार माता पार्वती ही जीती. खेल समाप्त होने के बाद जब उस बालक से हार-जीत का फैसला सुनाने के लिए कहा गया. तो उस बालक ने महादेव को विजयी घोषित कर दिया.  इससे माता पार्वती बहुत क्रोधित हुई और उन्होंने उसे लंगड़ा होकर कीचड़ में पड़ने रहने का शाप दे दिया.
बालक ने माता पार्वती से क्षमा मांगते हुए कहा कि यह अज्ञानता वश हुआ है. कृपया मुझे माफ़ कीजिए.  काफी अनुनय-विनय के बाद माता पार्वती ने कहा कि ‘यहां गणेश पूजन के लिए नागकन्याएं आती हैं. जैसा ये कन्याएं कहें वैसे ही गणेश जी का व्रत करें. ऐसा करने से तुम मुझे प्राप्त करोगे.’ यह कहकर शिव-पार्वती कैलाश चले गए.12 महीने के बाद उस स्थान पर नागकन्याएं आयीं. उन्होंने गणेश भगवान की पूरी व्रत कथा बताई. उस बालक ने 21 दिन तक लगातार गणेश जी का व्रत किया. उसकी श्रद्धा देख गणेश जी बेहद प्रसन्न हो गए. उन्होंने बालक को मनवांछित फल प्रदान किया.
बालक ने कहा कि हे विनायक मुझमें इतनी शक्ति दें कि हम हम अपने पैरों से कैलाश पर्वत पर जाएँ. गणेश जी ने बालक को बरदान दिया और वह अंतर्ध्यान हो गए. फिर बालक कैलाश पर्वत पर पहुंचे और व्रत कथा शिव जी को सुनाया. शिवजी ने भी 21 दिन का व्रत किया. इसके प्रभाव से माता पार्वती के मन में शिव जी के प्रति जो नाराजगी थी, वह दूर हो गई.  उसके बाद शिवजी ने यह व्रत कथा पार्वती को सुनाई. पार्वती जी ने यह 21 दिन तक यह व्रत किया. इससे 
यह सुन माता पार्वती ने भी पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा लेते हुए यह व्रत किया. व्रत के 21वें दिन कार्तिकेय स्वयं माता पार्वती जी से आ मिले. उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का यह व्रत समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत माना जाता है.
 
Christmas 2022 Celebration Live: दुनिया भर में क्रिसमस की धूम, आज मनाया जाएगा ‘ज़ीज़स’ का जन्म दिन
Christmas 2022: क्रिसमस पर जानें कैसे – कहां हुआ था प्रभू यीशू का जन्म, ये है उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
Garuda Purana: जीवनकाल में कैसे कर्म करने वालों को होती है स्वर्ग या नरक की प्राप्ति, जानें
Vaibhav lakshmi Vrat: वैभव लक्ष्मी व्रत कब कैसे करें, क्या खाएं, किस समय करें पूजा, जानें संपूर्ण विधि
Shattila Ekadashi 2023: नए साल में षटतिला एकादशी का है खास महत्व, नोट करें और मुहूर्त
Covid-19 In India: कोरोना से निपटने की तैयारी, मॉक ड्रिल में अस्पताल की तैयारियों का लिया जाएगा जायजा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को दिए ये निर्देश
Tunisha Sharma Death: तुनिषा का अपने को-एक्टर शिजान से था अफेयर, 5 दिन पहले दोनों में हुआ था झगड़ा
IND vs BAN: ढाका टेस्ट में टीम इंडिया पर हार का खतरा, लेकिन सिराज बोले- चिंता की बात नहीं, पंत और अय्यर हैं…
Christmas 2022: हिंदू बच्चों को पैरेंट्स की अनुमति के बिना क्रिसमस पर सांता क्लॉज बनाया तो होगी कार्रवाई, VHP की चेतावनी
रामसेतु का कोई वजूद न मानकर क्या मोदी सरकार ने कर लिया सेल्फ गोल?
यह वेबसाइट कुकीज़ या इसी तरह की तकनीकों का इस्तेमाल करती है, ताकि आपके ब्राउजिंग अनुभव को बेहतर बनाया जा सके और व्यक्तिगतर तौर पर इसकी सिफारिश करती है. हमारी वेबसाइट के लगातार इस्तेमाल के लिए आप हमारी प्राइवेसी पॉलिसी से सहमत हों.

source


Article Categories:
धर्म
Likes:
0

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *