हनुमान जी ने क्यों लगाया अपने पूरे शरीर पर सिंदूर? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा – India.com हिंदी

Published: November 1, 2022 10:00 AM IST
By Renu Yadav
Lord Hanuman Pujan Vidhi: भगवान हनुमान को संकटमोचन भी कहा जाता है और मान्यता है कि अगर विधि-विधान के साथ हनुमान जी का पूजन किया जाए तो वह अपने भक्तों के सभी संकट हर लेते हैं. मंगलवार व शनिवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है और इस दिन उनको यदि सिंदूर चढ़ाया जाए तो वह अति प्रसन्न होते हैं. आपने हनुमान मंदिर में देखा होगा कि हनुमान जी की मूर्ति सिंदूर से रंगी होती है और उनकी पूजा करते वक्त सिंदूर से उनका श्रृंगार किया जाता है. जबकि आमतौर पर सभी भगवानों को रोली व सिंदूर का तिलक किया जाता है. आइए जानते हैं आखिर क्यों हनुमान के पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया जाता है?

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई भक्त किसी संकट से जूझ रहा है तो हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से उसके सभी संकट दूर होते हैं. इससे हनुमान जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं. इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि सिंदूर चढ़ाने से हनुमान जी अपने भक्त के जीवन में आ रही सभी बाधाओं को दूर करते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. हनुमान के शरीर पर लगे सिंदूर को एक पौराणिक कथा काफी प्रचलित है.
पौराणिक कथा के अनुसार त्रेता युग में माता सीता अपनी मांग में सिंदूर लगाया करती थीं. एक बार माता सीता मांग में सिंदूर लगा रही थी तभी हनुमान वहां पहुंच गए और उनको सिंदूर लगाते वक्त जिज्ञासापूर्वक पूछा कि माता आप अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगाती हैं? इस प्रश्न के जवाब में माता सीता ने कहा कि वे अपने स्वामी, अपने पति श्रीराम की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं. हिंदू धर्म शास्त्रों में प्राचीन काल से सुहागिने अपनी मांग में सिंदूर लगाती आ रही है. इससे पति की आयु लंबी होती है.
यह सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि वो भी तो अपने आराध्य भगवान श्रीराम से बहुत प्रेम करते हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करते हैं. अगर मांग भरने से उनकी उम्र लंबी होती है तो मैं अपने पूरे शरीर में सिंदूर लगा लेता हूं इससे मेरे प्रभु अमर हो जाएंगे. यही सोचकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर में सिंदूर लगा लिया. बस तभी से हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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