देश के हर धर्म को पढ़ेंगे विद्यार्थी तो विदेशों की संस्कृति भी जानेंगे – दैनिक जागरण (Dainik Jagran)

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जागरण संवाददाता भिवानी देश में हर धर्म के लोग रहते हैं। धर्म के लोगों के बारे में जानने
जागरण संवाददाता, भिवानी : देश में हर धर्म के लोग रहते हैं। धर्म के लोगों के बारे में जानने और उन धर्मों के ज्ञान अब हर विद्यार्थी को मिलेगा। शिक्षा विभाग और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की तरफ से जारी की जा रही दसवीं की इतिहास की पुस्तकों में इसके बारे में पूरा ज्ञान दिया गया है। दसवीं में इसको लेकर विशेष अध्याय जोड़ा गया जिसमें विद्यार्थी अध्याय तीन में विश्व के प्रमुख दर्शन को पढ़ेंगे। इसमें प्रमुख धर्मों के बारे में बताया गया है।
इतिहास की पुस्तक को बोर्ड की तरफ से बदला गया है। इसमें भारतीय संस्कृति को बताने के साथ ज्ञान को बढ़ाया गया है। बोर्ड की इस संस्कृति में दसवीं के अध्याय तीन में छात्रों को वेदों की शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ जैन दर्शन, बौद्ध दर्शन, पारसी और यहूदी दर्शन भी होंगे। इसमें बताया गया है कि जैन दर्शन की उत्पति में जिन का अर्थ इंद्रियों को जीतने वाला हैं। सरस्वती-सिधु सभ्यता के लिए जलवायु परिवर्तन कारण

देश में रही सरस्वती सिधु सभ्यता के पतन के लिए जलवायु परिवर्तन को उत्तरदायी माना जा सकता हैं। वर्षा कम होने के कारण तथा सरस्वती नदी सूख जाने के कारण हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में इस सभ्यता की बिस्तियों का विनाश हुआ होगा। इसी प्रकार मोहनजोदाड़ों, चान्हुदड़ो, लोथल और भगतराव के उत्खनन से बाढ़ के प्रमाण मिले हैं। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि इस सभ्यता के पतन में बाढ़ की भी भूमिका रही होगी। मोहनजोदड़ों के समय थी मलेरिया जैसी महामारी
इतिहास की दसवीं की पुस्तक में स्पष्ट हैं कि मोहनजोदड़ों से 42 मानव कंकाल प्राप्त हुए थे। सरकार की तरफ से उस पर अध्ययन करवाने से पता चला कि इसमें 41 लोगों की मौत मलेरिया जैसी महामारी से हुई हैं। अनुमान है कि महामारी के कारण इस सभ्यता का पतन हुआ होगा। विदेशों की सभ्यता को जानें छात्र
इतिहास की पुस्तक में भारत के साथ विदेशों की सभ्यता को पूरा महत्व दिया गया हैं। इसमें रोम, चीन सहित कई अन्य देशों की सभ्यता को बताया गया है। चीन के बारे में बताया गया कि वहां उद्योग धंधों का आश्चार्यजनक रूप से विकास हुआ था। चीन के लोगों का मुख्य व्यवसाय रेशम का उद्योग था। इसके अलावा वह मछली पकड़ने का काम भी करते थे। चीन के लोग वंशानुगत व्यवसाय करते थे और इसे बदलना पाप समझते थे।
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