5 करोड़ से ज्‍यादा टर्नओवर वाली कंपनियों पर भी जरूरी होगा GST e-invoicing, क्‍या होगा असर और किसे मिलेगा फा… – News18 हिंदी

नई दिल्‍ली. सरकार जीएसटी (GST) में एक और बड़े बदलाव पर विचार कर रही है. इसके तहत 5 करोड़ से ज्‍यादा टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए जीएसटी ई-इनवॉइस (GST e-invoicing) जेनरेट करना अनिवार्य कर दिया जाएगा.
बिजनेस स्‍टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, जीएसटी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकार अनुपालन को आसान बनाने और टैक्‍स चोरी को रोकने के लिए ई-इनवॉइस की अनिवार्यता का दायरा बढ़ाने जा रही है. अभी 20 करोड़ या उससे ज्‍यादा टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए ही ई-इनवॉइस जरूरी है. जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस दायरे को दो फेज में घटाया जाएगा. पहले फेज में 10 करोड़ या उससे ज्‍यादा टर्नओवर वाली कंपनियों पर ई-इनवॉइस जरूरी बनाया जाएगा. फिर इस थ्रिसॉल्‍ड को घटाकर 5 करोड़ रुपये सालाना किया जाएगा.
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गौरतबल है कि सरकार ने 1 अक्‍तूबर, 2020 को 500 करोड़ तक टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए इसे जरूरी बनाया था. इसके बाद 1 जनवरी, 2021 को इसे घटाकर 100 करोड़ कर दिया गया, जबकि 1 अप्रैल 2021 को फिर बदलकर 50 करोड़ तक टर्नओवर तय कर दिया. 1 अप्रैल, 2022 को फिर इसका दायरा घटाकर 20 करोड़ टर्नओवर पर ला दिया गया था.
तीन से चार महीने में हो जाएगा लागू
जीएसटी नेटवर्क ने नई व्‍यवस्‍था को अगले तीन से चार महीने में लागू करने की बात कही है. सभी कंपनियों और कारोबारियों को इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (आईटीसी) क्‍लेम करने के लिए अपने इंटरनल सि‍स्‍टम अथवा बिलिंग सॉफ्टवेयर पर इन्‍वॉइस जेनरेट करना जरूरी होगा और इसकी रिपोर्ट इन्‍वॉइस रजिस्‍ट्रेशन पोर्टल पर भी देनी होगी.
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अभी क्‍या है इन्‍वॉइस की स्थिति
जीएसटीएन के मुताबिक, अभी 20 करोड़ से 50 करोड़ टर्नओवर वाले 2.19 लाख जीएसटी आईडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआईएन) हैं, जिसमें से महज 1.53 लाख ही इन्‍वॉइस जेनरेट करते हैं. इसी तरह, 50 से 100 करोड़ टर्नओवर में भी 86,963 जीएसटीआईएन हैं, जिसमें से महज 48,217 ही इन्‍वॉइस जेनरेट करते हैं.
सरकार का कहना है कि जीएसटी इन्‍वॉइस का थ्रिसॉल्‍ड कम करने से टैक्‍स चोरी पर लगाम कसने में मदद मिलेगी. साथ ही खरीदारों को इनपुट टैक्‍स क्रेडिट का लाभ मिलेगा. उनके लिए आईटीसी क्‍लेम करना आसान होगा जाएगा और इसकी प्रक्रिया भी जल्‍द पूरी हो जाएगी. इसका मतलब है कि ई-इन्‍वॉइस कम टर्नओवर पर लागू होना कारोबारी और सरकार दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा.
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