बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड के साथ रेप- कैसे मोबाइल वीडियो से सामने आया मामला – BBC हिंदी

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बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड
महाराष्ट्र के सह्याद्रि टाइगर रिज़र्व में एक बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड यानी गोह के साथ कथित तौर पर रेप करने का मामला सामने आया है.
इस सिलसिले में चार लोगों के ख़िलाफ़ संदेह के आधार पर मामला दर्ज कर जाँच की जा रही है.
इन चार लोगों के ख़़िलाफ़ 31 मार्च को चंदोली नेशनल पार्क में अवैध तरीक़े से घुसने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था.
ये पार्क टाइगर रिज़र्व के भीतर आता है.
अधिकारियों ने मामला दर्ज करने के बाद इन अभियुक्तों के मोबाइल फ़ोन की जाँच की और तब गोह के साथ हुई इस घटना का पता चला.
सह्याद्रि टाइगर रिज़र्व महाराष्ट्र के चार ज़िलों सतारा, सांगली, कोल्हापुर और रत्नागिरी में फैला है.
कथित रेप की ये घटना रत्नागिरी ज़िले के गोठणे गाँव की बताई जा रही है.
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चंदोली नेशनल पार्क में बाघों की गिनती के लिए ट्रैप कैमरा लगाए गए हैं.
इन कैमरों का मुआयना करने के दौरान पता चला कि गोठणे गाँव के एक इलाक़ से एक कैमरा ग़ायब है.
लेकिन इसके सामने लगे दूसरे कैमरे से कुछ संदिग्ध लोगों को देखा गया. ये लोग शिकार में इस्तेमाल होने वाले हथियार लेकर जाते दिखाई दिए.
इसके बाद 31 मार्च को वन्य संरक्षण ऐक्ट 1972 के तहत अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एक केस दर्ज किया गया.
इसके बाद मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, जाँच टीम हातिव गाँव पहुँची जहाँ एक संदिग्ध को गिरफ़्तार किया गया जिसने माना कि वो शिकार के लिए वन्य क्षेत्र में घुसा था.
बाद में, इसी मामले में रत्नागिरी ज़िले के मारल गाँव से दो अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया गया. इस मामले में अब तक कुल चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
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बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड
वन अधिकारियों ने इसके बाद संदिग्ध लोगों के मोबाइल फ़ोन की जाँच की गई जिसमें खरगोश, हिरण, पेगोलिन जैसे कई जानवरों की तस्वीरें मिलीं.
साथ ही अधिकारियों को एक वीडियो मिला जिसमें साढ़े चार फ़ीट लंबे एक गोह के साथ अप्राकृतिक अत्याचार किया जा रहा था.
वन अधिकारियों को संदेह है कि ये वीभत्स हरकत इन्हीं संदिग्ध लोगों ने की है.
हालाँकि, चंदोली नेशनल पार्क के फ़ॉरेस्ट रेंजर नंदकुमार नलवड़े ने बीबीसी को बताया कि इन लोगों ने अभी शिकार की बात मानी है, मगर गोह के साथ अत्याचार की बात से इनकार किया है.
रेंजर ने बताया कि इस वीडियो को साइबर पुलिस को सौंप दिया गया है जो वीडियो की सत्यता की जाँच कर रही है.
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अधिकारी ने बताया जंगल में अवैध प्रवेश का दोषी पाए जाने पर उन्हें 5 लाख रुपये के जुर्माने और 7 वर्ष तक के सश्रम कारावास की सज़ा हो सकती है.
मगर नलवड़े ने बताया कि गोह के साथ अत्याचार का दोषी पाए जाने पर उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत 10 साल तक जेल की सज़ा हो सकती है.
चारों संदिग्ध लोगों को 8 अप्रैल को देवरुख़ कोर्ट में पेश किया गया जिसने उन्हें 22 अप्रैल तक 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
हालाँकि इसके बाद उन्हें कुछ शर्तों के तहत ज़मानत दे दी गई थी.
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वन्य प्राणियों को पालना, बेचना या शिकार करना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अपराध माना जाता है.
हालाँकि, जानवरों के हितों के लिए काम करने वाली संस्था प्राणीमित्र का कहना है ि क़ानून में जानवरों के साथ क्रूरता को लेकर सख़्त प्रावधान नहीं हैं.
जानवरों के शिकार के मामलों के विशेषज्ञ वकील बासवराज होसगॉडर कहते हैं,"मानव क्रूरता पर सबका ध्यान जाता है, मगर जानवरों के साथ क्रूरता एक बड़ा मुद्दा है. पुलिस और वन विभाग की ओर से देरी एक बड़ा प्रश्न है."
क़ानून में पालतू जानवरों के साथ क्रूरता के लिए सज़ा और जुर्माना बहुत कम है.
1960 के पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के तहत किसी पालतू जानवर को यातना देने और मार डालने के लिए केवल तीन महीने जेल और 50 रुपये जुर्माने की सज़ा का प्रावधान है.
वहीं 1972 के वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत जंगली प्राणियों के साथ क्रूरता या उनको मारने के लिए 3 से 7 साल की जेल और 25,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.
बासवराज होसगॉडर कहते हैं, सज़ा और जुर्माने को बढ़ाने की ज़रूरत है. पिछले कुछ सालों में जानवरों के साथ क्रूरता को देखते हुए क़ानून में बदलाव होना चाहिए.
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