देवी के 24 रूप: आद्यशक्ति, ब्राह्मी, वैष्णवी सहित 24 शक्तियां स्थापित हैं हरिद्वार में, इनकी पूजा से अशांति… – Dainik Bhaskar

चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है। शक्ति और भक्ति के इन नौ दिनों में श्रद्धा और अपनी शक्ति के अनुसार मां भगवती की आराधना करते हैं। क्या आप जानते है? तीर्थ नगरी हरिद्वार के उत्तर में सप्त सरोवर विस्तार में ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान में है यह 24 शक्ति धाराएं स्थापित हैं। इनकी पूजा से भक्त को ज्ञान के साथ ही शांति मिलती है। गायत्री परिवार से संस्थापक आचार्य श्री राम शर्मा ने इन 24 शक्ति धाराओं के बारे में बताया है। जानिए इस 24 धाराओं के बारे में…
आद्यशक्ति- आद्यशक्ति यानी सृष्टि की मूल चेतना। आदिदेव ऊँकार के रूप में इसे ही सर्वोपरि पूज्य माना गया है। यहां एक मुख्य मंदिर है, जिसे ज्ञान मंदिर के रूप में निर्मित किया गया है। समग्र गायत्री महाविद्या के मर्म को यहां समझा जा सकता है।
ब्राह्मी- ब्राह्मी यानी महाविद्या, सद्ज्ञान, सुविचार। अच्छे विचारों को जगाने-उगाने वाली महाशक्ति।
वैष्णवी- ये शक्ति बुद्धि का पर्याय है। संसार में व्यवस्था करने वाली, परिपोषण करने वाली विश्वंभर शक्ति हैं वैष्णवी।
शांभवी- अवांछनीय चीजों का निवारण करने वाली शक्ति है शांभवी। सृष्टि में संतुलन के लिए अनिवार्य शक्ति है। ये शक्ति अपने प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में गुण, कर्म, स्वभाव का शुद्ध करती है।
वेदमाता- ज्ञान की समस्त ज्ञात-अज्ञात धाराओं की गंगोत्री है वेदमाता।
देव माता- देवत्व को जन्म देने वाली माता हैं देव माता।
विश्व माता- सार्वभौम संस्कृति के संविधान को संचालित करने वाली शक्ति है विश्व माता।
ऋतंभरा- सत्य-असत्य, औचित्य-अनौचित्य में साधक की मदद करने वाली शक्ति हैं ऋतंभरा।
मंदाकिनी- गंगा के समान पवित्र करने वाली देवी हैं मंदाकिनी।
अजपा- निश्चल स्थिति-अविचल निष्ठा की सिद्धि देने वाली देवी अजपा हैं।
ऋद्धि- आत्मिक विभूतियों से व्यक्ति को असाधारण बनाने वाली शक्ति ऋद्धि हैं।
सिद्धि- वैभव की अधिष्ठात्री, मनुष्य को समृद्ध-संपन्न बनाने वाली देवी सिद्धि हैं।
सावित्री- अचेतन के रहस्यों को दूर करने वाली पंचमुखी सावित्री शक्ति हैं।
सरस्वती- बुद्धि को प्रखर करने वाली देवी हैं सरस्वती जी।
लक्ष्मी- संपन्नता और सुख-शांति देती हैं लक्ष्मी जी।
महाकाली- महाकाली असुरता का संहार करने वाली देवी हैं।
कुंडलिनी- ये जीवन की सामान्य ऊर्जा को असामान्य बनाने वाली तंत्र विद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं।
प्राणाग्नि- साधक को प्राणवान बनाने वाली देवी हैं प्राणाग्नि।
भुवनेश्वरी- संसार को चलाने वाली शक्ति भुवनेश्वरी हैं।
भवानी- ये व्यक्ति को नेतृत्व के गुणों का धनी बनाने वाली हैं।
अन्नपूर्णा- इस शक्ति की कृपा से भक्त के जीवन में किसी चीज का अभाव नहीं रहता है।
महामाया- ये देवी भ्रमों का, उलझनों का निवारण करती हैं।
पयस्विनी- ये धरती लोक की कामधेनु हैं। इनकी कृपा से भक्त का तेज बढ़ता है और उसे कोई अभाव नहीं रहता है।
त्रिपुरा- ओजस, तेजस और वर्चस्व बढ़ाने वाली देवी त्रिपुरा हैं।
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